
गूगल ने भारत के धान खेतों से 1 मिलियन कार्बन क्रेडिट खरीदने का ऐतिहासिक सौदा किया है, जो मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक रूप से घोषित समझौता है। यह चार‑वर्षीय अनुबंध कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लगभग 100,000 हेक्टेयर धान खेतों को कवर करेगा। वित्तीय शर्तें अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
मीथेन कटौती और जल बचत: मिट्टी लैब्स का अभिनव दृष्टिकोण
मिट्टी लैब्स, एक 2023 में स्थापित स्टार्टअप, ने धान के खेतों में पानी के स्तर को कम करके मीथेन उत्सर्जन को लगभग 50 % और जल उपयोग को 40 % तक घटाने का दावा किया है, जबकि उपज पर कोई असर नहीं पड़ता। यह तकनीक किसानों को कम समय तक खेतों को बाढ़ में रखने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे मीथेन उत्पादन कम होता है।
इस परियोजना के तहत किसानों को नई प्रथाओं को अपनाने के लिए भुगतान किया जाएगा। मिट्टी लैब्स ने पिछले दो वर्षों में 500 अर्ब लीटर से अधिक पानी बचाया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मॉडल बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।
गूगल का नेट‑ज़ीरो लक्ष्य और कार्बन क्रेडिट रणनीति
गूगल 2030 तक नेट‑ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ संघर्ष कर रहा है, क्योंकि 2025 में इसके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 18 % बढ़कर लगभग 14.5 मिलियन मीट्रिक टन CO₂e हो गए। इस लक्ष्य को पाने के लिए कंपनी ने कार्बन क्रेडिट में भारी निवेश किया है।
गूगल ने पहले जनवरी 2025 में गुरुग्राम‑आधारित वरा के साथ 100,000 टन कार्बन क्रेडिट खरीदकर भारत में पहला बड़ा कार्बन हटाने का सौदा किया था, जो बायोचार आधारित था।
मिट्टी लैब्स के साथ गूगल का पहला संपर्क
मिट्टी लैब्स के सह-संस्थापक ज़ेवियर लैगुआर्टा ने बताया कि गूगल के साथ वार्ता एक वर्ष पहले शुरू हुई थी। गूगल ने इस परियोजना के जल बचत और बड़े पैमाने पर संचालन की क्षमता को आकर्षक पाया।
गूगल ने मिट्टी लैब्स की मॉनिटरिंग तकनीक का निरीक्षण किया और खेतों का दौरा किया, इससे पहले कि दोनों पक्षों ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
टेक्नोलॉजी और डेटा: GeoAI प्लेटफ़ॉर्म
मिट्टी लैब्स ने एक GeoAI प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है जो उपग्रह रडार इमेजरी और फील्ड मापों को मिलाकर फसल वृद्धि, मिट्टी की नमी और बाढ़ की स्थिति को दूरस्थ रूप से ट्रैक करता है।
इस प्लेटफ़ॉर्म में 50 सेमी से 10 मीटर तक के रेज़ोल्यूशन वाले सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) इमेजरी का उपयोग किया जाता है, साथ ही फील्ड में एकत्रित प्रोपाइटरी डेटा से AI मॉडल को प्रशिक्षित किया जाता है।
सर्टिफ़िकेशन और तृतीय‑पक्ष सत्यापन
मिट्टी लैब्स द्वारा गूगल को बेचे जाने वाले क्रेडिट या तो गोल्ड स्टैंडर्ड या इज़ोमेट्रिक के तहत जारी किए जा सकते हैं। दोनों सर्टिफ़िकेशन बॉडीज़ स्वतंत्र तृतीय‑पक्ष सत्यापन के माध्यम से परियोजनाओं की पुष्टि करती हैं।

अन्य साझेदार और भविष्य की योजनाएँ
मिट्टी लैब्स ने पहले ही कूल इफ़ेक्ट, एब्रॉ फूड्स और सायनजेंटा जैसे ग्राहकों के साथ काम किया है। गूगल के साथ यह सौदा कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा ऑफ़टेक डील है।
कंपनी वर्तमान में 100,000 से अधिक किसानों के साथ काम कर रही है और 2030 तक लाखों किसानों तक पहुँचने का लक्ष्य रखती है। गूगल के साथ यह समझौता इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मिट्टी लैब्स का राजस्व मुख्यतः कृषि समुदायों को जाता है, हालांकि गूगल परियोजना में भाग लेने वाले किसानों को मिलने वाली राशि का खुलासा नहीं किया गया है।
भारत के अलावा, मिट्टी लैब्स इस वर्ष फिलीपींस में संचालन शुरू करने और 2027 में इंडोनेशिया तथा अन्य दक्षिण‑पूर्व एशियाई बाजारों में विस्तार करने की योजना बना रही है।
बाजार की संभावनाएँ और उद्योग का भविष्य
ज़ेवियर लैगुआर्टा ने बताया कि 150 मिलियन किसानों द्वारा धान उगाया जाता है, जो भारत, दक्षिण‑पूर्व एशिया और चीन में फैले हुए हैं। यह दर्शाता है कि कृषि‑आधारित मीथेन कटौती परियोजनाओं के लिए विशाल बाजार मौजूद है।
गूगल ने भारत में अपनी सप्लाई‑चेन उत्सर्जन को कम करने के लिए 150 मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिससे रीन्यू के साथ इसकी सोलर क्षमता 300 मेगावाट तक पहुँच गई है।
वर्तमान स्थिति और आधिकारिक बयान
गूगल और मिट्टी लैब्स ने अभी तक अनुबंध के वित्तीय विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन दोनों पक्षों ने यह पुष्टि की है कि यह समझौता 2030 तक 1 मिलियन कार्बन क्रेडिट की आपूर्ति करेगा।
मिट्टी लैब्स के अनुसार, यह सौदा कंपनी को बड़े कॉर्पोरेट खरीदारों के साथ काम करने के लिए आवश्यक पैमाने पर पहुँचने में मदद करेगा। गूगल के साथ यह साझेदारी उनके लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि गूगल को सबसे परिष्कृत खरीदार माना जाता है।
इस ऐतिहासिक सौदे के साथ, गूगल ने अपनी कार्बन न्यूट्रलिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जबकि मिट्टी लैब्स ने भारत के धान खेतों में जल और मीथेन दोनों की खपत को कम करने के अपने मिशन को आगे बढ़ाया है।