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रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने 16 सितंबर से शुरू होने वाले अगले दो हफ़्तों में कुल 1 ट्रिलियन रुपये के बांड बिक्री की घोषणा की है। पहली किस्त 17 सितंबर को 500 बिलियन रुपये के बांड के रूप में होगी, जबकि 21 और 28 सितंबर को क्रमशः 250 बिलियन रुपये की बिक्री की जाएगी। यह कदम बैंकिंग प्रणाली में जमा हुई अतिरिक्त नकदी को अवशोषित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

बैंकिंग प्रणाली में जमा हुई अतिरिक्त नकदी

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकों के पास सितंबर में लगभग 10.25 ट्रिलियन रुपये की अतिरिक्त नकदी थी, जो जमा के लगभग 3.8% के बराबर है। यह अतिरिक्त नकदी मुख्यतः RBI के विशेष विदेशी मुद्रा जुटाने के योजना के तहत $127 बिलियन के जुटाव के कारण हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक के रिज़र्व्स ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुँच गए।

इस अतिरिक्त नकदी के कारण ओवरनाइट दरें मौद्रिक नीति के कॉरिडोर के तल से नीचे चली गईं, जिससे RBI को तरलता अवशोषण के लिए कदम उठाने पड़े।

RBI के पास उपलब्ध तरलता अवशोषण उपकरण

रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक के पास VRRR (वेरिएबल रेट रिवर्स रिपोज़), ओपन मार्केट ऑपरेशन्स और FX स्वैप्स जैसे कई उपकरण उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “कुछ भी बंद नहीं है” और RBI इन सभी विकल्पों का उपयोग कर सकता है।

हाल ही में RBI ने दो उपकरणों का उपयोग किया: लंबी अवधि का VRRR और डॉलर-रुपया सेल-बाय स्वैप्स। हालांकि, इन दोनों पर सीमित रुचि दिखाई दी।

बाजार की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों की राय

ट्रेडर्स ने कहा कि केंद्रीय बैंक को सेल/बाय स्वैप्स जारी रखने चाहिए और इसके साथ ही FX योजना के तहत जमा पर CRR (कैश रिज़र्व रेशियो) में वृद्धि करनी चाहिए। करूर वायसा बैंक के ट्रेजरी प्रमुख VRC रेड्डी ने यह सुझाव दिया कि ओपन मार्केट में बांड बिक्री को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि बांड बिक्री से सरकारी उधारी लागत बढ़ सकती है, खासकर जब तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और ट्रेजरी यील्ड्स ने पिछले चार हफ्तों में 10-वर्षीय बांड यील्ड को 26 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ा दिया है।

इसके अलावा, एक अनाम स्रोत ने बताया कि RBI बाजार स्थिरीकरण योजना का उपयोग केवल अंतिम उपाय के रूप में कर सकता है, जबकि CRR में वृद्धि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि बांड यील्ड्स को इन उपकरणों से बहुत अधिक प्रभावित नहीं होना चाहिए।

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बांड बिक्री का ऐतिहासिक संदर्भ

रिज़र्व बैंक ने सितंबर 2024 में द्वितीयक बाजार में बांड बिक्री की थी। 2021 और 2022 में बैंक ने एक साथ बांड खरीद और बिक्री की थी। अक्टूबर 2014 में, RBI ने ऑक्शन रूट के माध्यम से एक निर्धारित बांड बिक्री की थी।

इन ऐतिहासिक बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए, बाजार ने यह अनुमान लगाया है कि RBI की वर्तमान बांड बिक्री नीति का उद्देश्य मौजूदा अतिरिक्त नकदी को अवशोषित करना और ब्याज दरों को स्थिर रखना है।

बांड बिक्री का समय और संरचना

बांड बिक्री की योजना इस प्रकार है:

  • 17 सितंबर: 500 बिलियन रुपये के बांड (वित्तीय वर्ष 2029 से 2032 तक परिपक्व)
  • 21 सितंबर: 250 बिलियन रुपये के बांड
  • 28 सितंबर: 250 बिलियन रुपये के बांड

कुल मिलाकर, यह बिक्री 1 ट्रिलियन रुपये के बांड को कवर करती है, जो RBI के तरलता प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

बाजार पर संभावित प्रभाव

बांड बिक्री से सरकारी बांड यील्ड्स पर दबाव पड़ सकता है, जिससे उधारी लागत बढ़ सकती है। इसके बावजूद, RBI ने यह स्पष्ट किया है कि यह कदम मौद्रिक नीति के कॉरिडोर को स्थिर रखने और ओवरनाइट दरों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है।

बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि यदि बांड बिक्री के बाद भी अतिरिक्त नकदी बनी रहती है, तो RBI को आगे के उपकरणों जैसे CRR में वृद्धि पर विचार करना पड़ेगा।

निष्कर्ष

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने 16 सितंबर से 1 ट्रिलियन रुपये के बांड बिक्री की योजना के साथ भारतीय बैंकिंग प्रणाली में जमा हुई अतिरिक्त नकदी को अवशोषित करने का निर्णय लिया है। इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य मौद्रिक नीति के कॉरिडोर को स्थिर रखना और ओवरनाइट दरों को नियंत्रित करना है। बाजार और विशेषज्ञों ने इस कदम पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दी हैं, लेकिन सभी सहमत हैं कि RBI को अपने उपलब्ध उपकरणों का संतुलित उपयोग करना होगा।