रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने सोमवार को 2.59 ट्रिलियन रुपये के 30‑दिन के वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) के माध्यम से बैंकिंग‑सिस्टम से अतिरिक्त तरलता निकाल ली, जबकि 7 ट्रिलियन रुपये के विकल्प के साथ यह कदम उठाया गया। उसी दिन RBI ने ओवरनाइट VRRR के जरिए अतिरिक्त 5 ट्रिलियन रुपये की तरलता को अवशोषित किया, जिसके लिए 3.53 ट्रिलियन रुपये की बोली लगाई गई।
बैंकिंग‑सिस्टम की तरलता पर त्वरित कदम
रिवर्स रेपो के माध्यम से RBI ने अब तक 8.5 ट्रिलियन रुपये से अधिक की राशि को बाज़ार से हटाया है। ये नीलामी बैंक को पिछले तीन महीनों में जमा की गई बड़ी संख्या में प्रवासी जमा से प्राप्त अतिरिक्त धनराशि को पार्क करने का अवसर देती हैं।
बैंकिंग‑सिस्टम में 11.16 ट्रिलियन रुपये ($118.11 बिलियन) की रिकॉर्ड तरलता की स्थिति 6 सितंबर को दर्ज की गई थी। इस अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए RBI ने रिवर्स रेपो के साथ-साथ विदेशी मुद्रा (FX) सेल/बाय स्वैप का भी उपयोग करने का संकेत दिया है।
रिवर्स रेपो और FX स्वैप के माध्यम से तरलता प्रबंधन
रिवर्स रेपो के अलावा, भारतीय बैंकों ने सुझाव दिया है कि RBI विदेशी मुद्रा सेल/बाय स्वैप का उपयोग करके अतिरिक्त रुपये की तरलता को कम कर सकता है। इससे ओवरनाइट कॉल रेट्स को मौद्रिक नीति के कोरिडोर के फर्श स्तर से नीचे रखने में मदद मिलेगी, जो तीसरे लगातार ट्रेडिंग सत्र के लिए हुआ है।
IDFC First Bank के प्रमुख अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, “इन दोनों उपकरणों की परिपक्वता छह महीने की हो सकती है और फिर मौजूदा तरलता स्थिति के आधार पर रोल ओवर किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि मिश्रित बाजार स्थिरीकरण बांड और FX स्वैप का उपयोग RBI के पास उपलब्ध विकल्पों में से एक है।
RBL बैंक का $1 बिलियन उधारी कार्यक्रम
RBL बैंक के बोर्ड ने विदेशी निवेशकों से एक यूरो मिडियम टर्म नोट (EMTN) कार्यक्रम के तहत एक अरब अमेरिकी डॉलर तक उधारी की मंजूरी दी है। बैंक का उधारी समिति इस पहल के सभी महत्वपूर्ण चरणों की निगरानी के लिए जिम्मेदार है।
यह निर्णय तब आया जब Emirates NBD बैंक ने RBL बैंक के बढ़े हुए शेयर पूंजी में 60 % नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल की है। इस कदम से RBL बैंक की पूंजी संरचना और अंतरराष्ट्रीय उधारी क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।
बांड यील्ड और बाजार की स्थिति
भारत के बेंचमार्क 6.94 % 2036 बांड की यील्ड सोमवार को 6.9607 % पर समाप्त हुई, जबकि शुक्रवार के समापन पर यह 6.9625 % थी।
ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप (OIS) में हल्की राहत देखी गई। एक वर्ष की दर 1.5 बेसिस पॉइंट घटकर 5.9750 % पर बंद हुई, जबकि दो वर्ष की दर भी 1.5 बेसिस पॉइंट घटकर 6.17 % पर बंद हुई। पाँच वर्ष की दर 0.5 बेसिस पॉइंट घटकर 6.4625 % पर बंद हुई।
तेल की कीमतों का प्रभाव
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स ने एशियाई व्यापार में 1.17 % बढ़कर $97.41 पर पहुंचा। इरान ने पर्शियन गॉल्फ में एक नया प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने की सूचना दी, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इस कारण बांड कीमतों में वृद्धि पर असर पड़ा है।
रिज़र्व बैंक की आगे की नीति दिशा
रिवर्स रेपो और FX स्वैप के माध्यम से RBI ने बैंकिंग‑सिस्टम की तरलता को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। 8.5 ट्रिलियन रुपये से अधिक की राशि को हटाने के बाद भी, बैंकिंग‑सिस्टम में 11.16 ट्रिलियन रुपये की अतिरिक्त तरलता की स्थिति बनी हुई है। RBI ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी यह मिश्रित उपकरणों का उपयोग जारी रखेगा, ताकि मौद्रिक नीति के कोरिडोर के भीतर ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सके।
रिवर्स रेपो के विकल्प के रूप में, RBI ने 30‑दिन के वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो के साथ-साथ ओवरनाइट VRRR का भी उपयोग किया है, जिससे बैंकिंग‑सिस्टम में अतिरिक्त तरलता को तुरंत अवशोषित किया जा सके। यह कदम RBI की मौद्रिक नीति को सुदृढ़ करने और बाजार में अस्थिरता को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
रिवर्स रेपो के साथ-साथ FX सेल/बाय स्वैप का उपयोग करके RBI ने बैंकिंग‑सिस्टम में अतिरिक्त रुपये की तरलता को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाई है। यह कदम RBI की मौद्रिक नीति के लक्ष्यों के अनुरूप है, जो कि ब्याज दरों को स्थिर रखने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए आवश्यक है।
रिवर्स रेपो और FX स्वैप के माध्यम से RBI ने बैंकिंग‑सिस्टम की तरलता को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। 8.5 ट्रिलियन रुपये से अधिक की राशि को हटाने के बाद भी, बैंकिंग‑सिस्टम में 11.16 ट्रिलियन रुपये की अतिरिक्त तरलता की स्थिति बनी हुई है। RBI ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी यह मिश्रित उपकरणों का उपयोग जारी रखेगा, ताकि मौद्रिक नीति के कोरिडोर के भीतर ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सके।