सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सबी) ने नसेल (नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड) के विवाद को सुलझाने के लिए 25 अगस्त 2025 से 25 फरवरी 2026 तक चलने वाली सेटलमेंट स्कीम के तहत 91 ब्रोकरों से कुल ₹6 लाख से ₹36 लाख तक की राशि वसूल की।
सबी का नसेल सेटलमेंट स्कीम 2025 – पृष्ठभूमि
नसेल, जो 2013 में बंद हो गया, के भुगतान डिफ़ॉल्ट के कारण लगभग 13,000 ट्रेडरों को नुकसान हुआ। इस विवाद को सुलझाने के लिए 12 दिसंबर 2023 को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने सूचित किया कि “सबी को एक सेटलमेंट स्कीम तैयार करनी चाहिए, और यह तीन महीनों के भीतर होना चाहिए।”
सबी ने उसी के बाद सबी (सेटलमेंट प्रोसीडिंग्स) रेगुलेशन्स, 2018 के तहत नसेल सेटलमेंट स्कीम 2025 लागू की। इस स्कीम का उद्देश्य नसेल के उल्लंघनों से संबंधित सिक्योरिटीज कानून के उल्लंघनों को निपटाना था, जबकि अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चल रहे जांचों को प्रभावित नहीं किया गया।
स्कीम के प्रमुख आँकड़े और समयरेखा
समीकरण के अनुसार, 9 सितंबर 2025 को जारी सेटलमेंट ऑर्डर में कहा गया: “91 संस्थाओं ने इस स्कीम का लाभ उठाया और निर्दिष्ट सेटलमेंट राशि जमा की।”
स्कीम 25 अगस्त 2025 से 25 फरवरी 2026 तक खुली रही, जिसके दौरान योग्य संस्थाओं को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से विवरण जमा करने और सेटलमेंट राशि का भुगतान करने का अवसर मिला।
विवादित ब्रोकरों के नाम और सेटलमेंट राशि
सभी 91 ब्रोकरों ने अलग-अलग राशि जमा की, जिनमें से अधिकांश ने लगभग ₹6 लाख का भुगतान किया। कुछ प्रमुख नाम और उनकी राशि निम्नलिखित हैं:
- एमके कमॉडिट्रेड – ₹30.84 लाख
- पेस कमॉडिटी ब्रोकर – ₹36.05 लाख
- रिलिगेयर कमॉडिटीज लिमिटेड
- एसएमसी कॉमट्रेड लिमिटेड
- जैनाम कमॉडिटीज
- एड्राइट कमॉडिटीज सर्विसेज
इनके अलावा अन्य 85 ब्रोकरों ने भी अपनी-अपनी राशि जमा की, जिनकी कुल राशि को सार्वजनिक रूप से विस्तृत नहीं किया गया है।
स्वैच्छिक डिबारमेंट और प्रतिबंध
सेटलमेंट शर्तों के तहत, कई ब्रोकरों ने स्वयं को छह महीने के लिए ट्रेडिंग से डिबार करने और नए क्लाइंट्स को कमॉडिटी सेक्टर में स्वीकार न करने पर सहमति व्यक्त की। कुछ ब्रोकरों ने एक महीने के प्रतिबंध को स्वीकार किया।
कुछ मामलों में, कोई स्वैच्छिक डिबारमेंट शर्त नहीं लगाई गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कुछ ब्रोकरों को केवल सेटलमेंट राशि का भुगतान करना था।
समीक्षा और भविष्य की दिशा
सबी के इस कदम से नसेल के विवाद को एक निश्चित रूप से समाप्त किया गया, जिससे लगभग 13,000 ट्रेडरों के लिए राहत मिली। हालांकि, यह स्कीम केवल सिक्योरिटीज कानून के उल्लंघनों को कवर करती है और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चल रही जांचों को प्रभावित नहीं करती।
सबी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सेटलमेंट स्कीम नसेल के भुगतान डिफ़ॉल्ट के कारण हुए नुकसान को पूरी तरह से मिटाने के लिए नहीं, बल्कि एक कानूनी और नियामक समाधान के रूप में कार्य करती है।
समीक्षा के अनुसार, 91 ब्रोकरों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और सेटलमेंट राशि का भुगतान कर दिया, जिससे नसेल के विवाद को एक कानूनी ढंग से समाप्त किया गया।
इस निर्णय के बाद, नसेल के विवाद से संबंधित सभी पक्षों को अब आगे की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है, और नसेल के ट्रेडरों के लिए यह एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
“सभी 91 संस्थाओं ने इस स्कीम का लाभ उठाया और निर्दिष्ट सेटलमेंट राशि जमा की,” 9 सितंबर 2025 को जारी सेटलमेंट ऑर्डर में कहा गया।