
चेनै, 4 सितंबर 2026 – भारत ने न्यूक्लियर इंजीनियरिंग शिक्षा को बढ़ाने के लिए कदम बढ़ाया है, जब ASME इंडिया ने चेनै में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बंबई और IIT मद्रास समेत अन्य प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम विकास पर चर्चा की गई।
ASME इंडिया का चेनै में आयोजन
ASME (American Society of Mechanical Engineers) इंडिया ने शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को चेनै में एक प्रमुख कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विश्व की सबसे बड़ी मैकेनिकल इंजीनियरिंग समुदाय को भारत लाया गया, जिसका उद्देश्य अगले औद्योगिक दशक के लिए प्रमाणित निर्माता, पेशेवर इंजीनियर और भविष्य के इंजीनियरिंग टैलेंट का विकास करना था।
“ASME भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम पर काम कर रहा है,” मधुकर शर्मा, ASME इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष ने कहा।
इस कार्यक्रम में ASME इंडिया ने भारतीय इंजीनियरिंग शिक्षा के भविष्य के लिए अपनी योजनाओं को स्पष्ट किया। कार्यक्रम के दौरान, ASME ने बताया कि वे IIT बंबई, IIT मद्रास और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के संकायों के साथ मिलकर नवीनतम पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं।
न्यूक्लियर इंजीनियरिंग शिक्षा का विस्तार
भारत में न्यूक्लियर इंजीनियरिंग शिक्षा का विस्तार करने के लिए ASME ने विशेष रूप से IIT बंबई और IIT मद्रास पर ध्यान केंद्रित किया है। इन दोनों संस्थानों में पहले से ही न्यूक्लियर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में मजबूत कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन ASME के सहयोग से इन कार्यक्रमों को और भी उन्नत बनाया जा रहा है।
मधुकर शर्मा ने बताया कि “भारत की रणनीतिक स्वायत्तता तकनीकी संप्रभुता पर निर्भर करती है और एक मजबूत घरेलू MSME आधार की आवश्यकता है जो वैल्यू चेन को ऊपर ले जा सके।” उन्होंने यह भी कहा कि “न्यूक्लियर और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मांग बढ़ रही है, और टियर-वन फर्मों को और अधिक सक्षम सप्लाई चेन पार्टनर्स की आवश्यकता है।”
MSME और तकनीकी स्वायत्तता
इवेंट में उपस्थित विशेषज्ञों ने यह भी जोर दिया कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए तकनीकी संप्रभुता और मजबूत MSME आधार अनिवार्य हैं। Air Marshal M. Matheswaran, भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी और पेनिनसुला फाउंडेशन के अध्यक्ष, ने MSME को केवल ब्लूप्रिंट से उत्पादन करने से आगे बढ़कर अपनी विशिष्टताओं को स्वामित्व में लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
“मुख्य अंतर केवल डिजाइन नहीं है, बल्कि धातुकर्म, विश्वसनीयता और दशकों से बना अनुभव ज्ञान है,” एयर मार्शल M. Matheswaran ने कहा।
उन्होंने आगे कहा कि “पाठ्यपुस्तकें पर्याप्त नहीं हैं, और अनुभवजन्य ज्ञान महत्वपूर्ण है।” इस टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि MSME को अपने उत्पादन प्रक्रियाओं में अधिक स्वायत्तता और नवाचार की आवश्यकता है।
इवेंट के प्रमुख बिंदु
1. पाठ्यक्रम विकास: ASME ने IIT बंबई, IIT मद्रास और IISc के संकायों के साथ मिलकर न्यूक्लियर इंजीनियरिंग के लिए नवीन पाठ्यक्रम तैयार करने की योजना बनाई है।
2. MSME का सशक्तिकरण: Air Marshal M. Matheswaran ने MSME को ब्लूप्रिंट से आगे बढ़कर अपनी विशिष्टताओं को स्वामित्व में लेने के लिए प्रेरित किया।
3. तकनीकी संप्रभुता: विशेषज्ञों ने बताया कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए तकनीकी संप्रभुता और MSME आधार की मजबूती आवश्यक है।
4. भविष्य के इंजीनियरिंग टैलेंट: ASME इंडिया ने अगले औद्योगिक दशक के लिए प्रमाणित निर्माता और पेशेवर इंजीनियरों के विकास पर जोर दिया।
आगे की दिशा
ASME इंडिया के अध्यक्ष मधुकर शर्मा ने कहा कि “हमारा लक्ष्य है कि भारत में न्यूक्लियर इंजीनियरिंग शिक्षा को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जाए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हमारी साझेदारी से MSME को तकनीकी स्वायत्तता प्राप्त होगी और वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।”
इवेंट के दौरान, ASME ने यह भी बताया कि वे भविष्य में और अधिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे ताकि भारतीय इंजीनियरिंग शिक्षा को और भी बेहतर बनाया जा सके।
समापन
चेनै में आयोजित इस कार्यक्रम ने भारत की न्यूक्लियर इंजीनियरिंग शिक्षा और MSME के सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। ASME इंडिया और भारतीय इंजीनियरिंग संस्थानों के बीच सहयोग से आने वाले वर्षों में भारत को तकनीकी स्वायत्तता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाने की उम्मीद है।
यह कार्यक्रम 5 सितंबर 2026 को 12:39 बजे प्रकाशित हुआ।