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रिवर्स रिपो ऑपरेशन के बाद बैंकिंग लिक्विडिटी में रिकॉर्ड वृद्धि, RBI की कड़ी नीतिगत चालों पर बाजार में चिंताएँ

11:15 बजे IST पर भारत के बेंचमार्क 6.94% 2036 बांड की यील्ड 6.9643% पर कारोबार कर रही थी, जबकि शुक्रवार के समापन पर यह 6.9625% थी। यह मामूली बढ़ोतरी बैंकिंग लिक्विडिटी के रिकॉर्ड स्तर और RBI के रिवर्स रिपो ऑपरेशन के बाद की बाजार प्रतिक्रिया को दर्शाती है।

रिवर्स रिपो ऑपरेशन और बैंकिंग लिक्विडिटी में रिकॉर्ड वृद्धि

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने 30‑दिन के वैरिएबल रेट रिवर्स रिपो ऑपरेशन के माध्यम से बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को अवशोषित करने का प्रयास किया। इस ऑपरेशन में 2.59 ट्रिलियन रुपये के ऑफ़र प्राप्त हुए, जिसके बाद RBI ने 5 ट्रिलियन रुपये के ओवरनाइट नीलामी के साथ आगे बढ़ा। इस कदम से बैंकिंग लिक्विडिटी का स्तर शुक्रवार को 10.73 ट्रिलियन रुपये पर पहुँच गया, जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है।

रिवर्स रिपो के माध्यम से बैंकों को अतिरिक्त नकदी पार्क करने का अवसर मिला, खासकर बड़े प्रवासी जमा से उत्पन्न अतिरिक्त फंड को। इस ऑपरेशन के बाद, भारतीय सरकारी बांड्स में संभावित लाभ की उम्मीदें बढ़ी, परंतु उच्च तेल कीमतों और ट्रेजरी यील्ड्स के कारण ऊपर की ओर गति सीमित हो सकती है।

बाजार की प्रतिक्रिया और ब्याज दरों पर प्रभाव

J.P. Morgan के एक नोट में कहा गया कि “रुपये की लिक्विडिटी के इस विशाल मात्रा ने ब्याज दरों में वास्तविक रूप से आसान बदलाव किया है, जो अगस्त MPC मिनट्स में संकेतित RBI की संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के विपरीत है।” इस प्रकार, बाजार में यह चिंता है कि RBI को इन नकदी प्रवाहों को कड़ी तरह से स्टेरिलाइज़ करना पड़ेगा।

रिवर्स रिपो ऑपरेशन के बाद, ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप्स (OIS) में भी बदलाव आया। एक वर्ष की दर 5.99% पर स्थिर रही, जबकि दो वर्ष की दर 6.18% पर हल्की गिरावट आई। पाँच वर्ष की दर 6.47% पर लगभग अपरिवर्तित रही। यह दर्शाता है कि बाजार ने RBI के कदमों के प्रति मिश्रित प्रतिक्रिया दिखाई है।

रुपये की लिक्विडिटी और RBI की रणनीति

रुपये की लिक्विडिटी में इस रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद, निजी बैंक ट्रेडर ने चेतावनी दी कि “बाजार बेच/खरीद स्वैप, OMO (बांड) बिक्री या CRR (कैश रिज़र्व रेशियो) में वृद्धि के डर से RBI द्वारा जून में घोषित सकारात्मक कदमों की उलटफेर हो सकती है।”

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पिछले हफ्ते, भारतीय ऋणदाताओं ने RBI के साथ एक बैठक में विदेशी मुद्रा बेच/खरीद स्वैप का प्रस्ताव रखा था, जिसका उद्देश्य अतिरिक्त रुपया लिक्विडिटी को निकालना था। इस कदम से ओवरनाइट कॉल रेट्स में गिरावट आई, जिससे अगस्त मिनट्स में संकेतित कड़ी मौद्रिक स्थिति पर असर पड़ा।

वैश्विक कारक और तेल की कीमतें

बाजार में सतर्कता का एक और कारण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें एशियाई व्यापार में 0.8% बढ़कर $97 प्रति बैरल पर पहुंच गईं। उच्च तेल कीमतों के साथ-साथ अमेरिकी और घरेलू ब्याज दरों पर दांव ने ट्रेडर्स को सतर्क बना दिया है।

इन वैश्विक कारकों के कारण, भारतीय बांड्स और स्टॉक मार्केट दोनों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। विशेषकर, Sensex और Nifty जैसे प्रमुख सूचकांकों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

2036 बांड यील्ड और भविष्य की दिशा

2036 बांड की यील्ड 6.9643% पर स्थिर रहने के बावजूद, यह स्पष्ट है कि RBI के रिवर्स रिपो ऑपरेशन और बैंकिंग लिक्विडिटी के स्तर ने बाजार में ब्याज दरों पर दबाव डाला है। यदि RBI को लगता है कि लिक्विडिटी का स्तर अत्यधिक है, तो वह आगे के कदमों के रूप में CRR में वृद्धि या OMO बिक्री पर विचार कर सकता है।

इस बीच, RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के अगस्त मिनट्स में संकेतित ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए, बाजार में यह सवाल बना हुआ है कि क्या RBI इस दिशा में आगे बढ़ेगा या मौजूदा लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए अधिक कड़ी नीतिगत उपाय अपनाएगा।

निष्कर्ष

रिवर्स रिपो ऑपरेशन के बाद बैंकिंग लिक्विडिटी में रिकॉर्ड वृद्धि और 2036 बांड यील्ड में मामूली बदलाव के बावजूद, बाजार में RBI की संभावित कड़ी नीतिगत चालों पर बेचैनी बनी हुई है। वैश्विक तेल कीमतों और अमेरिकी ब्याज दरों के प्रभाव से ट्रेडर्स सतर्क हैं। RBI को अब यह तय करना है कि क्या वह मौजूदा लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए और अधिक कड़ी नीतिगत कदम उठाएगा या मौजूदा ब्याज दर बढ़ोतरी के संकेतों के साथ आगे बढ़ेगा।