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नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026 – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ते हुए शिक्षण के महत्व पर बल दिया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित किया गया और यह दिन शिक्षकों के दिन के रूप में मनाया गया। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा संविधान में निहित समान अवसर के आदर्श को साकार करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय के न्यूनतम ड्रॉपआउट दर को शिक्षकों के प्रयासों का परिणाम बताया और सभी शिक्षकों की सराहना की।

शिक्षा के आधार पर राष्ट्र का निर्माण

राष्ट्रपति ने बताया कि स्कूल शिक्षा शिक्षा प्रणाली की नींव है। ज्ञान और कौशल किसी भी समय प्राप्त किये जा सकते हैं, परंतु बचपन में अच्छे आचरण का शिक्षण अधिक प्रभावी है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर ध्यान केंद्रित करके शिक्षक भविष्य की पीढ़ियों को उत्कृष्ट छात्र और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बना सकते हैं।

विविध पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए शिक्षकों की ज़िम्मेदारी

राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि कई छात्र आर्थिक रूप से वंचित परिवारों से आते हैं; कुछ प्रथम-पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं; अन्य ग्रामीण विद्यालयों से बड़े शहर के विद्यालयों में स्थानांतरित होते हैं; कुछ स्वाभाविक रूप से शर्मीले हैं; कुछ में अपार प्रतिभा है पर आत्मविश्वास की कमी है; और कुछ विशेष जरूरतों वाले बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की विशेष जिम्मेदारी है कि वे इन सभी छात्रों में आत्मविश्वास जगाएँ और उन्हें उन्नति की दिशा में अग्रसर करें।

शैक्षणिक उत्कृष्टता और कौशल विकास का महत्व

राष्ट्रपति ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, कौशल विकास और उद्यमिता को देश के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत को विश्व का कौशल राजधानी बनाने और ज्ञान महाशक्ति में बदलने को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत किया।

विकसित भारत की दिशा में शिक्षा की भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि हम विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं और यह लक्ष्य केवल विश्व‑स्तरीय शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि हमारे शिक्षक शिक्षा प्रणाली में जीवन का संचार करते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे देश में किसी भी छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर से वंचित न किया जाए। उन्होंने यह भी बल दिया कि शिक्षकों को अपने प्रेम और समर्पण के माध्यम से सभी छात्रों में ज्ञान, प्रेरणा, नैतिकता और संवेदनशीलता का संचार करना चाहिए।

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“शिक्षा संविधान में निहित समान अवसर के आदर्श को साकार करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। प्राथमिक विद्यालय के न्यूनतम ड्रॉपआउट दर को शिक्षकों के प्रयासों का परिणाम बताया। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर से वंचित न किया जाए।” – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह का सारांश

समारोह में देश भर के शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा गया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित किया गया और यह दिन शिक्षकों के दिन के रूप में मनाया गया। राष्ट्रपति ने शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान ने देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों की मेहनत और समर्पण के बिना प्राथमिक विद्यालय के ड्रॉपआउट दर को इतना कम करना संभव नहीं होता।

भविष्य के लिए शिक्षा नीति की दिशा

राष्ट्रपति ने शिक्षा नीति के भविष्य के लिए कुछ प्रमुख बिंदु प्रस्तुत किये। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को इस तरह से विकसित किया जाना चाहिए कि सभी छात्रों को समान अवसर मिले। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिकता और संवेदनशीलता भी सिखानी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी जोर दिया कि कौशल विकास और उद्यमिता को शिक्षा के मुख्य स्तंभों में शामिल किया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति का समापन संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने समापन में कहा कि शिक्षकों के बिना शिक्षा प्रणाली अधूरी है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने प्रेम और समर्पण के माध्यम से छात्रों में ज्ञान, प्रेरणा, नैतिकता और संवेदनशीलता का संचार करें। उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे देश में किसी भी छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर से वंचित न किया जाए।

समारोह का समापन 4:53 बजे IST पर हुआ।