
कुमिझ़ वृक्ष के लिए DUS परीक्षण दिशानिर्देश तैयार करने हेतु कन्नन सी.एस. वारियर को कार्य बल के अध्यक्ष नियुक्त
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संरक्षण एवं किसानों के अधिकार प्राधिकरण (Protection of Plant Varieties and Farmers Rights Authority) ने आज घोषणा की कि कर्नाटक के केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (KFRI) के निदेशक कन्नन सी.एस. वारियर को कुमिझ़ वृक्ष के लिए DUS (Distinctness, Uniformity, Stability) परीक्षण दिशानिर्देश तैयार करने हेतु कार्य बल के अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह निर्णय 6 सितंबर 2026 को सुबह 7:21 बजे (IST) प्रकाशित हुआ।
कुमिझ़ वृक्ष और उसकी औद्योगिक महत्ता
कुमिझ़ वृक्ष, जिसे आयुर्वेद में दसमूल का हिस्सा माना जाता है, अपनी तेज़ वृद्धि और उच्च उत्पादन के कारण उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसके औद्योगिक मूल्य के कारण, इस वृक्ष की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी मानक अनिवार्य हैं।
कुमिझ़ वृक्ष के लिए DUS परीक्षण एक अनिवार्य चरण है, जो नई पौध प्रजाति को बौद्धिक संपदा संरक्षण (Intellectual Property Protection) देने से पहले किया जाता है। यह परीक्षण तीन मुख्य मानदंडों—विभिन्नता (Distinctness), समानता (Uniformity), और स्थिरता (Stability)—पर आधारित है।
DUS परीक्षण के मुख्य मानदंड
विभिन्नता (Distinctness): नई पौध प्रजाति को किसी भी मौजूदा प्रजाति से स्पष्ट रूप से अलग होना चाहिए। पत्ती के आकार, फूल के रंग या पौधे की ऊँचाई में कम से कम एक स्पष्ट अंतर होना अनिवार्य है।
समानता (Uniformity): उस प्रजाति के सभी पौधों में मुख्य गुणों में समानता होनी चाहिए।
स्थिरता (Stability): पौधे के गुण लगातार खेती के बाद भी अपरिवर्तित रहना चाहिए। बीज या कटिंग के माध्यम से अगली पीढ़ी तक गुणों का स्थिर रहना आवश्यक है।
इन मानदंडों के आधार पर ही पौध प्रजनकों को पौध प्रजनक अधिकार (Plant Breeders’ Rights) प्रदान किया जाता है।
कार्य बल का उद्देश्य और कार्यक्षेत्र
कन्नन सी.एस. वारियर के नेतृत्व में गठित कार्य बल का मुख्य उद्देश्य कुमिझ़ वृक्ष के लिए DUS परीक्षण दिशानिर्देश तैयार करना है। यह दिशानिर्देश निम्नलिखित कार्यों में सहायक होंगे:
- बाजार में पहुँचने वाले क्लोन या प्रजातियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, जिससे नकली प्रजातियों का प्रसार रोका जा सके।
- किसानों को उच्च गुणवत्ता, विश्वसनीय रोपण सामग्री उपलब्ध कराना, जिससे उनकी आय में सुधार हो।
- विभिन्न वानिकी परियोजनाओं के लिए उपयुक्त प्रजातियों का चयन करने में सहायता।
कुमिझ़ वृक्ष के DUS परीक्षण दिशानिर्देश किसानों के लिए एक विश्वसनीय मानक स्थापित करेंगे, जिससे वे बेहतर लाभ कमा सकेंगे।
कन्नन सी.एस. वारियर का परिचय
कन्नन सी.एस. वारियर, केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक, ने राष्ट्रीय स्तर पर तीन कैसूरीना (काटादी) क्लोन विकसित करके सॉडिक मिट्टी के लिए उपयुक्त बनाया है। उनके कार्यों के लिए उन्हें निम्नलिखित पुरस्कारों से नवाज़ा गया है:
- राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार (National Award of Excellence) – वन विज्ञान में उत्कृष्ट शोध के लिए।
- रोल्ला एस. राव राष्ट्रीय पुरस्कार (Rolla S. Rao National Award) – जैव विविधता संरक्षण में सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता के रूप में।
- स्प्रिंगर नेचर (Springer Nature) का एडिटर ऑफ डिस्टिंक्शन ग्लोबल अवार्ड (Editor of Distinction Global Award)।
इसके अलावा, वारियर और उनके सहयोगियों ने डिजिटल इमेज का उपयोग करके वनरोपण की उपज निर्धारित करने की तकनीक पर पेटेंट भी प्राप्त किया है।
कुमिझ़ वृक्ष के DUS दिशानिर्देश का महत्व
कुमिझ़ वृक्ष के DUS दिशानिर्देश से निम्नलिखित लाभ अपेक्षित हैं:
• नकली प्रजातियों के प्रसार को रोकना, जिससे किसानों को विश्वसनीय रोपण सामग्री मिल सके।
• औद्योगिक उपयोग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियों का चयन सुनिश्चित करना।
• वानिकी परियोजनाओं में उपयुक्त प्रजातियों का चयन करने में सहायता।
इन दिशानिर्देशों के लागू होने से कुमिझ़ वृक्ष की औद्योगिक और आयुर्वेदिक दोनों ही क्षेत्रों में विश्वसनीयता बढ़ेगी।
वर्तमान स्थिति और आगामी कदम
कुमिझ़ वृक्ष के लिए DUS परीक्षण दिशानिर्देश तैयार करने का कार्य अभी प्रारंभिक चरण में है। कार्य बल के अध्यक्ष के रूप में कन्नन सी.एस. वारियर ने कहा कि वे जल्द ही दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार करेंगे और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करेंगे।
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार दिशानिर्देश अंतिम रूप से स्वीकृत हो जाने पर, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा, जिससे किसानों और उद्योगों को लाभ होगा।
इस निर्णय के साथ, संरक्षण एवं किसानों के अधिकार प्राधिकरण ने कुमिझ़ वृक्ष के लिए एक मजबूत कानूनी ढाँचा तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
कुमिझ़ वृक्ष के DUS परीक्षण दिशानिर्देश के कार्यान्वयन से किसानों को बेहतर लाभ और उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री उपलब्ध होगी, जिससे देश की कृषि और औद्योगिक दोनों ही क्षेत्रों में प्रगति होगी।